एकता में शक्ति” ही भारत की सबसे बड़ी पहचान : सिंह

एकता में शक्ति” ही भारत की सबसे बड़ी पहचान : सिंह ऋषिकेश 23 जनवरी महामहिम राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंहने आज श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश में आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने उत्तीर्ण हुए विद्यार्थियों को उपाधियां और सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान कर शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में उन्होंने उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे शिक्षकों को भी सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने परिसर में अतिथि गृह, टाइप-5 आवास और बहुउद्देशीय भवन का भी लोकार्पण किया। अपने संबोधन में महामहिम ने कहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धियों से अधिक प्रसन्नता उनके माता-पिता और शिक्षकों के चेहरे पर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य समाज की सबसे बड़ी सफलता का प्रतीक है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि विश्वविद्यालय के 21,664 विद्यार्थियों ने आज डिग्री प्राप्त की है और वे सभी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सहभागी बनने जा रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि हमारी युवा और अमृत पीढ़ी भारत के वर्ष 2047 के विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। राज्यपाल ने स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि उनके भीतर आत्मविश्वास, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये सभी विद्यार्थी भविष्य के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। उन्होंने कहा कि स्वर्ण पदक कठिन परिश्रम, अनुशासन और निष्ठा का परिणाम होता है, जो सभी के भाग्य में नहीं होता। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि डिग्री प्राप्त करने के बाद वे केवल नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि रोजगार सृजक, उद्यमी और नवाचार कर्ता बनें। उन्होंने युवाओं को नशा, भ्रष्टाचार और स्वार्थ से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए कर्मयोगी बनने का आह्वान किया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि शोध पत्रों का प्रकाशन और पेटेंट किया जाना विश्वविद्यालय की मजबूत शोध संस्कृति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि शोध और नवाचार ही भारत को विश्व गुरु बनाएंगे और पेटेंट पंजीकरण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने एलुमनाई का मिलाप और विभिन्न विषयों पर गठित छात्र क्लबों की भी सराहना की, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक हैं। राज्यपाल ने कहा कि आज की आवश्यकता है कि हमारी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाए। उन्होंने इसे 21वीं सदी का सबसे बड़ा अवसर बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार की एकजुटता की प्रशंसा करते हुए कहा कि “एकता में शक्ति” ही भारत की सबसे बड़ी पहचान है।

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